सबरीमला : रसोई और शय्या की वस्तु को मंदिर में प्रवेश नहीं , धर्म और परम्परा का पालन अतिआवश्यक
| 14 Nov 2019

जन उदय : हाल ही में जिस तरह कुछ अधर्मी महिलाए हजारो साल पुरानी परम्परा तोड़ सबरीमला मंदिर में प्रवेश की लड़ाई लड़ रही है उनको शायद ये पता नहीं की समाज में आज जितनी भी अराजकता फैली है वह केवल और केवल भारतीय समाज की परम्परा की अनदेखी के कारण हो रही है

आज समाज में जिस तरह शुद्र जिस तरह बराबरी का हक मांग रहे है उसकी सबसे बड़ी वजह भारतीय सविंधान है जिसका अंत होना बहुत जरूरी है

भारतीय समाज में नारी को देवी का दर्जा दिया गया है वह पूजनीय है आदरणीय है लेकिन आज समानता के नाम पर जिस तरह इन्हें जीवन के हर क्षेत्र में बराबरी का दर्जा दिया जा रहा हाउ जैसे इन्हें उच्च शिक्षा दी जा रही है , नौकरी आदि में आरक्षण और वरीयता दी जा रही है ,सम्पति में बराबरी का हक दिया जा रहा है इन्ही कारणों से पति पत्नी , भाई बहनों में तनाव बढ़ता जा रहा है पुरुषो की बराबरी को होड़ में ये पुरुषो से लड़ने लगी है जो की परम्परा के अनुसार बिलकुल गलत है

भारत के सामाजिक –धार्मिक ग्रंथो में औरतो को देवी का दर्जा है फिर इन्हें क्या चाहिए ?? महिलाओं को अधिकार देने के चक्कर में आज सामाजिक बुराइया बढती जा रही है जे एन यु संस्थानों में लडकिया स्वतंत्र रूप से सेक्स कर रही है , जबकि भारत की परम्परा में पहले से ही स्वयम्वर की वाव्स्था है तो ये लडकिया क्यों अपने माँ बाप की इज्जत उछल रही है ,

अगर महिलाओं को नौकरी से निकाल दिया जाए तो भारत में बेरोजगारी की समस्या काफी हद तक अपने आप समाप्त हो जाएगी फिर इनको काम करने की जरूरत भी क्या है ?? जब पति कमाएगा तो घर में आएगा तो इनके पास ही कमाया हुआ पैसा , इसलिए इनको नौकरी से जल्द ही निकाल देना चाहिए ताकि पुरुषो को नौकरी मिल सके
भारतीय साधू समाज बार बार ये कहता है कि औरतो को घर परिवार देखना चाहिए और अपनी आने वाली संतानों को सही नागरिक बनाने की दिशा में कदम उठाना चाहिए इसकी वकालत बार बार राष्ट्र पुरोहित संघ चालक श्री मोहन भागवत जी ने कई बार की है लेकिन दुर्भाग्य है इस देश का ऐसा कुछ नहीं हो पाता . दूसरी तरह मानिनीय प्रधानमंत्री श्रे नरेंद्र मोदी जी सिर्फ अपनी राजनीति चमकाने के लिए कई बार कह चुके है की बेटी बचाओ – बेटी पढाओ लेकिन ऐसी बेटियो का क्या फायदा जो अपने घर परिवार और जाति का अपमान कराती है ?? ऐसी बेटियो का मर जाना बेहतर है और इतिहास गवाह है भारतीय समाज ने अपनी आन और मान के लिए बेटियो को पैदा होते ही उन्हें जमीन में दफना दिया करते थे .

आज अगर हमें भारतीय समाज को बचाना है तो सबरीमाला हादसे जैसी घटनाओं को तुरंत रोकना होगा और वैदिक समाज की स्थापना में भरसक प्रयत्न करने होंगे मेरी तो यह बात ही समझ में नहीं आती की इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का क्या काम ??

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