ठंड ने बढायी नितम्ब की पीड़ा
| 19 Nov 2019

.ठंड के मौसम में कई लोग अचानक बवासीर या हेमरॉइड्ज से पीड़ित हो जाते हैं। चिकित्सकों के अनुसार बवासीर के इलाज के लिए चिकित्सक से परामर्श करने वाले काफी लोगों में इस मौसम के दौरान बवासीर आष्चर्यजनक रूप से बढ़ जाता है। मौसम ठंडा और शुष्क होने के कारण त्वचा षुश्क हो जाती है और बवासीर की पुनरावृत्ति बहुत अधिक होती है। रोगी की गुदा में खुजली होने लगती है, गुदा से रक्त आने लगता है और इनके अलावा रोगी अन्य लक्षणों को भी महसूस करने लगता है। वास्तविकता यह है कि यहां तक कि यदि आपने बवासीर की सर्जरी करा भी ली हो, तो भी गांठ के दोबारा बनने की संभावना होती है। ऐसा सर्जरी कराने की बजाय अधिक से अधिक लोगों के द्वारा घरेलू उपचार करने के कारण होता है।

बवासीर या हेमरायड्स क्या है

हेमरायड्स गुदा के आसपास त्वचा के नीचे नसों के गुच्छे होते हैं। इसे दो वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है - आंतरिक (गुदा के अंदर) या बाह्य (गुदा के बाहर)। रक्त वाहिकाओं पर अत्यधिक दबाव डालने वाली किसी भी गतिविधि से इसका खतरा बढ़ जाता है।

चिकित्सीय कारण
पुराना कब्ज, मल त्याग में जोर लगाना, लगातार दस्त, गर्भावस्था, मोटापा, और पारिवारिक इतिहास इसके कुछ आम कारण हैं।
जीवन शैली से संबंधित कारण
खानपान की गलत आदतें, अधिक जोर लगाने वाले व्यायाम, लंबे समय तक बैठना या यात्रा करना और तरल पदार्थों का कम सेवन का बवासीर पैदा करने में मुख्य योगदान होता है।

इलाज
हल्के बवासीर का परंपरागत ढंग से इलाज किया जा सकता है। बवासीर पर नियंत्रण पाने के लिए आहार में पर्याप्त मात्रा में रेषेदार खाद्य पदार्थों का सेवन आवष्यक है और मल को मुलायम बनाने वाले पदार्थों के सेवन से भी काफी फायदा होता है।
षल्य चिकित्सा से उपचार
दुर्भाग्य से अधिकतर बवासीर सर्जन पुरानी तकनीक का उपयोग करने पर अधिक जोर देते हैं। लेकिन ऐसी सर्जरी के कारण ऊतकों को नुकसान पहुंचता है, रिकवरी धीरे- धीरे होती है और मल त्याग करने में अत्यधिक दर्द होता है।
लेजर उपचार: नवीनतम उपचार

लेजर उपचार से पहले रोगी के गुदा क्षेत्र में लंबे समय तक असर रहने वाले लोकल एनीस्थिसिया का इंजेक्षन दिया जाता है ताकि जब रोगी होष में आए, तो उसे कोई दर्द महसूस न हो। बड़े हेमरॉयड्स को लेजर का इस्तेमाल करकेे हटाया जाता है। इसमें लेजर मषीन को कटिंग मोड में रखा जाता है। लेजर की किरणें चीरे को सील कर देती है जिसके कारण टांके लगाने की जरूरत आम तौर पर नहीं पड़ती है। लेजर किरणें इसतनी छोटी होती है कि हेमरॉयड्स को अच्छी तरह से देखा जा सकता है और मल त्याग को नियंत्रित करने वाली मांसपेषियों को नुकसान पहुंचने का खतरा नहीं होता है। इस कारण से, हमने एक भी ऐसा रोगी नहीं देखा है जिसे लेजर हेमरॉयडेक्टमी के बाद मल या गैस को नियंत्रित करने में दिक्कत आ रही हो।

बड़े हेमरॉयड्स का लेजर उपचार करने के बाद, लेजर को वेपराइजिंग मोड में रखकर छोटे हेमरॉयड्स को वाष्पीकृत कर दिया जाता है। इससे एक छोटा और दर्दरहित निषान होता है जो जल्दी ही भर जाता है।
पारंपरिक सर्जरी की तुलना में लाभ
ऽ लेजर उपचार अधिक प्रभावी होता है
ऽ इससे कम ऊतकों को नुकसान होता है
ऽ अधिक हेमरॉयड्स को दूर करने की क्षमता होती है
ऽ ऊतकों को कम नुकसान होने के कारण कम दर्द होता है
ऽ घाव जल्द भरता है और तेजी से रिकवरी होती है
ऽ प्रक्रिया के कुछ ही घंटों के भीतर अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है
ऽ इन सभी कारणांे से, कम जटिलताएं होती है।

डॉ. आशीष भनोट
सर्जन, नई दिल्ली
Email: drashishbhanot@gmail.com
Mb: 9717985247