सविंधान की मूल भावना के खिलाफ और माइंड गेम से ज्यादा कुछ नहीं एन आर सी : श्री जावेद अली खान , सपा सांसद
| 06 Dec 2019

सविंधान की मूल भावना के खिलाफ और माइंड गेम से ज्यादा कुछ नहीं एन आर सी : श्री जावेद अली खान , सपा सांसद
जन उदय : भारत में कितने लोग है कितने औरत कितने मर्द किस उम्र के इसका लेखा जोखा हमें
जनगडणा से मिल जाते है लेकिन भाजपा का राजनीती का अपना एक गेम है वह है वोटो का ध्रुवीकरण यानी हिन्दू –मुसलमान की आग फैलाना चाहे रास्ता कोई भी हो . एन आर सी भी वही गेम है जिसे भाजपा खेल रही है , एन आर सी की बात करते वक्त भाजपाई एक शब्द इस्तेमाल करते है घुसपेठिया यानी हथियार लेकर कोई आदमी किसी विध्वंस कार्य करने वाला दूसरा ये घुसपेठिया आया कहा से बांग्लादेश या पाकिस्तान यानी मुसलमान . समाजवादी सांसद श्री जावेद अली खान का कहना है भाजपा नेता कहते तो बांग्लादेश या पाकिस्तान लेकिन भक्तो को सुनाई देता है मुसलमान तो इस तरह हुआ मुस्लमान हुआ घुसपेठिया , “ इसके अलावा अपने और भी फंडे इस्तेमाल करते है भाजपाई

श्री जावेद अली खान ने बताया एन आर सी सबसे पहले असाम में लागू हुआ है जिसमे उन्नीस लाख लोग विदेशी यानी बंगलादेशी पाए गए और उसमे से बारह लाख लोग हिन्दू निकले बस यही भाजपा के गले की फांस बन गई है पाकिस्तान और बंगलादेश की नाराजगी के बाद खुद मोदी ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री को आश्वासन दिया है की बांग्लादेश पर भारत की एन आर सी का बोझ नहीं डाला जाएगा , यानी किसी भी बंगलादेशी को वापिस नहीं भेजा जा सकेगा

असाम में बारह लाख हिन्दू पाय जाने के बाद बाद गृह मंत्री अमित शाह ने वेस्ट बंगाल की और भारत के कई स्थानों पर लोगो को यह भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहे है एन आर सी के जरिये हिन्दुओ को कोई नुक्सान नहीं होगा बल्कि एन आर सी को देश में लागू करने से पहले सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल लाया जाएगा जिसमे बांग्लादेश , मयन्मार पाकिस्तान , अफगानिस्तान आदि के सिर्फ मुस्लिम को छोड़ भारत की नागरिकता तुरंत दी जाएगी
श्री जावेद अली खान ने बिल पर कहा गृह मंत्री अमित शाह का ऐसा ब्यान और बिल में ऐसा प्रावधान सविंधान की मूल भावना के एकदम खिलाफ है और इसे बिलकुल बर्दास्त नहीं किया जाएगा दरसल भाजपा की अब दिलचस्पी विकास , रोजगार , अर्थ वाव्य्स्था में बिलकुल नहीं है बल्कि वो इसी तरह के सगूफे छोड़ देश की जनता को गुमराह करके रखना चाहती है ,

खैर शाह की यह योजना न सिर्फ सांप्रदायिकता, भय और लोगों को बांटने पर आधारित है, बल्कि यह झूठ पर भी टिकी है. ऐसा इसलिए है, क्योंकि बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के हिंदू, बौद्ध, जैन, ईसाइयों को शामिल करने की सरकार की योजना की एक निर्धारित तारीख (कट-ऑफ तारीख) है, जो 31 दिसंबर, 2014 है.

2015 और 2016 में सरकार ने पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम और विदेशियों विषयक अधिनियम में संशोधन करके यह घोषणा की थी कि इन तीन देशों के इन खास धर्मों के लोगों को भारत के कानून के हिसाब से कभी भी ‘अवैध अप्रवासी’ नहीं माना जाएगा, बशर्ते वे 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत आ गए हों.