कौन है असली कामचोर?
| 22 Sep 2016

कई मर्तबा देखा गया है कि कुछ लोग जानबूझ कर लोगों पर आरोप लगाते हैं कि फलां आदमी कामचोर है। दफ्तरों में भी अक्सर टीका टिप्पणी चलती रहती है। कान भरना फैशन सा हो गया है। मेरे विचार से असली कामचोर वही है जो काम करने की बजाय दूसरों के काम में ज़रूरत से ज़्यादा दखल देते हैं, उनपर निगाह रखते हैं, बेवजह शिकायतें करते हैं। आखिर उनको इतना वक्त मिलता कैसे है? वे अपने काम पर कब ध्यान देते हैं?
मेरा प्रश्न मामूली नहीं है। ज़रा रुकिये और सोचिये।
काम करने वाले को पांच मिनट सर खुजलाने की फुरसत नहीं मिलती तो कोई अपने कमरे में बैठकर क्या कर रहा है बिना सीसीटीवी के वो कैसे पता लगा लेते हैं? अद्भुत क्षमता व दिव्य दृष्टि प्राप्त ऐसे लोगों को सीआईडी में होना चाहिये। यदि वे स्वंय बाहर दौरे पर जाते हैं तो उनके पीछे कार्य करने वाले लोग अपना काम ईमानदारी से कर रहे हैं यह जांचने का क्या तरीका हो सकता है?
आप कहेंगे कि यह कैसा बच्चों जैसा प्रश्न है?
पर इसे पूछने का एक कारण है। मेरी दिलचस्पी समस्या से ज़्यादा समाधान में है। कुछ लोग अक्सर यह दोष भी लगाते हैं कि उनके किये काम में थोड़ा बहुत परिवर्तन कर किसी दूसरे ने अपने नाम से भेज दिया। अब रोज़मर्रा के काम का कापीराईट नहीं करवाया जा सकता। चालाक लोग काम दूसरे से काम करवाते हैं और कापी पेस्ट से काम चला लेते हैं।
अक्सर शैतान खोपड़ी के लोग स्वंय वक्त के पाबंद नहीं होते। उनके अधीनस्थ लोग भी इसका फायदा उठाते हैं। उनहें स्वंय समय का पाबंद होना चाहिये।यदि वे समय पर सभी काम करें तो दूसरे भी वक्त पर आने पर मजबूर होंगे। कुछ कार्यालयों में आने का समय निर्धारित होता है परन्तु जाने का नहीं। ऐसे में कुछ लोग काम को देर से खत्म करते हैं ताकि बीच में गप्पें हांक सकें , वहीं दूसरे लोग जिन्हें जाने की जल्दी रहती है वे काम खत्म कर चले जाते हैं। बाद में अनावश्यक एक दूसरे पर कामचोरी के आरोप लगाते हैं।
समाधान ढूंढ़िये।

कामचोरी का आरोप लगाना बहुत सरल है। यह सिर्फ आपकी अपनी अक्षमता दर्शाता है। क्यों आपका ध्यान सिर्फ शिकायत करने में है? आप इससे निबटने के सही तरीके अब तक क्यों नहीं ढूंढ पाये? क्या आपका काम शिकायत करने से खत्म हो जाता है? आप उस कर्मचारी को शिकायत कर स्थानांतरित करवा भी दो तो भी यदि वो वास्तव में कामचोर होगा तो स्थिति नयी जगह भी यथावत ही रहेगी।
यदि कार्य करवाने वाला शिकायतें बंद कर दूसरों को सही तरीके से काम करना सिखाये तो समस्या खत्म हो सकती है।बेहतर होगा कि काम करवाने के तरीके बदले जायें। काम को रुचिकर बनाया जाये ताकि लोग भागें नहीं बल्कि अच्छा काम करें। कई प्राइवेट कम्पनियां ट्रेनिंग कोर्सेज़ चलाती हैं। माहौल अच्छा रखने से कम समय में दुगना काम लिया जा सकता है। वैसे भी घंटों से ज़्यादा काम की गुणवत्ता महत्व रखती है। व्यर्थ के दोषारोपण से कार्यालयों का कीमती वक्त बरबाद होता है जहां आधा समय दोष लगाने और आधा समय जवाब देने में नष्ट हो जाता है। इससे बेहतर है कि काम का उचित विभाजन हो ताकि मूल्यांकन करते समय सही तथ्य सामने आयें। हर कमरे में सीसीटीवी हों ताकि सब अपना काम करें और दोषारोपण के मामले कम हों। अपने चहेते कर्मचारियों को अनावश्यक छुट्टी ना दें। इससे आपस में रोष फैलता है।
साथ ही ओवर एनर्जेटिक लोगों को छोटी नहीं बल्कि बड़ी जगहों पर लगाया जाना चाहिये ताकि वे कम समय में दस लोगों का काम अकेले कर सकें। वैसे भी आने वाला समय मशीनों का है तो आप भी टीम भावना से काम करें ताकि इंसान की महत्ता सिद्ध की जा सके।
अब बताइये, असली कामचोर कौन है? शिकायत करने वाला या जिसकी शिकायत की गई वह इंसान, इसका फैसला मैं आप पर छोड़ती हूं।