हर किसी को खुश करना है नामुमकिन
| 26 Sep 2016

हम समाज और परिवार के बीच रहते हैं जहां रोज़ नये लोगों से हमारा आमना सामना होता रहता है। कुछ लोग परिचित, कुछ अपरिचित तो कुछ नितांत अजनबी होते हैं। कभी कभी हमें सराहना देने वाले कई लोग मिल जाते हैं। पर कभी ऐसे लोग भी हमारे वातावरण में आ जाते हैं जिनसे आसानी से छुटकारा नहीं मिलता। ये कुछ इस तरह के प्राणी होते हैं जिन्हें कभी प्रसन्न नहीं किया जा सकता। हम सबका सामना जीवन में एक ना एक बार ऐसे लोगों से होता ही है।
आप यदि काम में होशियार हों तो इन्हें स्वीकार करने में परेशानी होती है क्योंकि इनसे दूसरे की प्रतिभा बर्दाश्त नहीं होती।
अगर आप काम में ढी़ले हों तो ऐसे लोग आपको काम सिखाने की बजाये सभी जगह आपकी दिल खोलकर बुराई करते हैं। असंतुष्ट रहना इनकी आदत बन जाती है। आप जो भी चाहे कर लो इनका स्वभाव समझ पाना मुश्किल होता है। कई बार हम समझ ही नहीं पाते की सामने वाला चाहता क्या है?अभी कुछ दिन पहले मैं एक ऐसे इंसान से मिली जिन्हें बहुमुखी प्रतिभा वाले लोगों से एतराज़ था। उनका मानना था कि ऐसे लोग कोई भी एक काम ठीक से नहीं कर पाते। जबकि बहुमुखी प्रतिभावान लोग इक्का दुक्का ही होते हैं और अपनी क्षमता से ऊपर भी कार्य कर सकते हैं। यह कोई बहस का विषय है ही नहीं कि कौन क्या कर सकता है।
वैसे भी नौजवान पीढी़ हमसे हर काम में माहिर है। जितना फासला उम्र में होता है उतना ही तकनीक आगे बढ़ जाती है और नयी पीढी़ पुरानी सोच को छोड़कर आगे बढ़ जाती है। किसी में कमी निकालना बेहद आसान होता है पर तारीफ करना बहुत मुश्किल होता है। हमें नकारात्मक विचार वाले लोगों से दूर रहना चाहिये। आप हर किसी को वैसे भी खुश नहीं कर सकते। जिसकी आदत ही दुखी रहने की हो वो कभी खुश नहीं हो सकता। उसे खुश करने में हम जीवन के अमूल्य क्षण गंवा देते हैं। किसी की सोच बदलना असंभव है। जो धारणा उसने बना ली वो उसे ही सही समझता है। भीड़ भी आंख मूंद कर ऐसे लोगों पर भरोसा करती है और अपना ही नुकसान करती है। क्योंकि आपके विचार भी ऐसे लोगों से प्रभावित होते हैं और अंत में आप सीखने की बजाये बहुत पीछे चले जाते हैं।
मेरा मानना है कि सबको खुश करने की बजाये हमें अपना काम अच्छे से करना चाहिये क्योंकि अच्छी प्रतिभा किसी के गुणगान की मोहताज नहीं होती। कस्तूरी की महक को छुपाया नहीं जा सकता है। अतः हमें खुद पर यकीन रखकर आगे बढ़ना चाहिये। सबको खुश ना कर कर्म पर ध्यान देना अच्छी आदत है। वैसे भी गलत बोलने वाला हर जगह अपने चरित्र का परिचय खुद ही दे देता है। इसलिए आगे बढो़ और खुश रहो। यही आपकी सीख भी है और वक्त की ज़रूरत भी।