एक काल्पनिक कथा: (कृपया इसे मोदी परिकर या अम्बानी की वार्ताओ से ना जोडे)
| 27 Sep 2016

"Sir, एक जहाज खरीदने की डील है, 1600 करोड के हिसाब से. प्रति जहाज अपने को करीब 800-900 करोड अपने पॉकेट मे जायेंगे।"

"पर इस जहाज को पिछली बार 715 करोड मे सौदा का ऑफर था और हमने विरोध कर दिया था, अब 1600 करोड के भाव से कैसे खरीद सकते हैं? टेंडर मंगायेंगे तो दूसरे लोग सही प्राइस कोट कर देंगे तो?"
"सर जी, अगर इमरजेंसी के नाम पर फटाफट खरीदें तो? देश हित के आंड मे? टेंडर काहे मंगाये।"
"अरे यार इस समय कौन सी इमरजेंसी है?"
"सर, इमर्जेंसी पैदा तो कर सकते हैं?"

"कैसे?"
"अगर पाकिस्तान भारत युद्ध का माहौल बन जाय तो?"
"कैसे?"
"अगर हम कुछ 15-20 सैनिक मरवा दे उनके आतंकियो के हाथो तो?"
"पर इंटेलीजेंस है, खबर दे देगी तो कैसे होगा?"
"सर खबर तो अपना सेक्योरिटी हेड वाला बंदा दबा देगा, पहले भी उसने उस आतंकी को छुडवाया था. उसका उस आतंकी पे फेवर का कुछ यूज भी वो कर लेगा. आतंकी भी वही भेज देगा।"
"और मीडिया? वो हमारे ऊपर टूट पडा तो?"

"कौन, ये कचरे? इन्हे आप अब भी मीडिया कहते हो? इन्हे तो जो कहो वो चाटेंगे, जो कहो वो बोलेंगे।"
"पर अपने 15-20 सैनिक मरवाना, ठीक होगा? पहले ही काफी मरवाये हैं. उसका नुकसान?"

"सर कौन सा सैनिक अपने संघ के हैं.. गरीब किसानो के नौकरी पेशा लोग हैं.. और फायदा भी तो देखो, प्रति जहाज लगभग 1000 करोड और इतने जहाज, इमरजेंसी के नाम पर समय भी नही लगेगा, झट से डील और खट से पैसा.."
"यार ऑफर तो सही है.. ठीक है करो जो करना है .. और हाँ मीडिया और संघी गिरोहो को भी तुम्ही बात कर लेना.."
"उनकी चिंता ना करो, कुत्तो को हड्डी पहुंच जायेगी, वो आपके हिसाब से ही होंगे, उल्टे डैमेज कंट्रोल भी करेंगे।"
(कृपया इसे दिल पर न लें)





"पर इस जहाज को पिछली बार 715 करोड मे सौदा का ऑफर था और हमने विरोध कर दिया था, अब 1600 करोड के भाव से कैसे खरीद सकते हैं? टेंडर मंगायेंगे तो दूसरे लोग सही प्राइस कोट कर देंगे तो?"
"सर जी, अगर इमरजेंसी के नाम पर फटाफट खरीदें तो? देश हित के आंड मे? टेंडर काहे मंगाये।"
"अरे यार इस समय कौन सी इमरजेंसी है?"
"सर, इमर्जेंसी पैदा तो कर सकते हैं?"

"कैसे?"
"अगर पाकिस्तान भारत युद्ध का माहौल बन जाय तो?"
"कैसे?"
"अगर हम कुछ 15-20 सैनिक मरवा दे उनके आतंकियो के हाथो तो?"
"पर इंटेलीजेंस है, खबर दे देगी तो कैसे होगा?"
"सर खबर तो अपना सेक्योरिटी हेड वाला बंदा दबा देगा, पहले भी उसने उस आतंकी को छुडवाया था. उसका उस आतंकी पे फेवर का कुछ यूज भी वो कर लेगा. आतंकी भी वही भेज देगा।"
"और मीडिया? वो हमारे ऊपर टूट पडा तो?"

"कौन, ये कचरे? इन्हे आप अब भी मीडिया कहते हो? इन्हे तो जो कहो वो चाटेंगे, जो कहो वो बोलेंगे।"
"पर अपने 15-20 सैनिक मरवाना, ठीक होगा? पहले ही काफी मरवाये हैं. उसका नुकसान?"

"सर कौन सा सैनिक अपने संघ के हैं.. गरीब किसानो के नौकरी पेशा लोग हैं.. और फायदा भी तो देखो, प्रति जहाज लगभग 1000 करोड और इतने जहाज, इमरजेंसी के नाम पर समय भी नही लगेगा, झट से डील और खट से पैसा.."
"यार ऑफर तो सही है.. ठीक है करो जो करना है .. और हाँ मीडिया और संघी गिरोहो को भी तुम्ही बात कर लेना.."
"उनकी चिंता ना करो, कुत्तो को हड्डी पहुंच जायेगी, वो आपके हिसाब से ही होंगे, उल्टे डैमेज कंट्रोल भी करेंगे।"
(कृपया इसे दिल पर न लें)
&p[url]=http://www.januday.com/NewsDetail.aspx?Article=9517&&p[images][0]=~/picture_library/l2Ku1aJFAUWcAHP6R98damitshah-modi.jpg" id="LeftPart_lnkFacebook" target="blank">