लिहाज़ को ना समझें कमज़ोरी : ऋतु
| 03 Oct 2016

आजकल अकसर शांत रहने व पलट कर जवाब ना देने वाले को कमज़ोर समझ लिया जाता है फिर चाहे बात सीमा पार की हो या अपने घर की। बात बात पर कुछ लोग उखड़ जाते हैं , अपनी मर्यादा छोड़कर दूसरों को उकसाते हैं। परिवारों में भी ऐसा होता है जब कुछ लोग सारे रिश्ते भूलकर दूसरों के सब्र का इम्तेहान लेते हैं। समाज में कुछ लोग बेवजह की बातें बनाते हैं। तोहमतें लगाना उनका मनपसंद शगल बन जाता है। अच्छे लोग बस लिहाज़ ही करते रह जाते हैं। ऐसा नहीं कि वो डरते हैं। इसकी वजह बेतुके झगड़ों से दूर रहना होता है ना कि डर।
बुरे लोग, बुरी ताकतें हर जगह मौजूद होती हैं। हर बार शांतिप्रिय मुल्क या लोग ही निशाने पर होते हैं।
चुप रहना शांति के लिए बहुत ज़रूरी है पर क्या सामने वाला व्यक्ति इतना समझदार होता है कि वो भलाई की भाषा समझ सके।
आतंकवादी भी इसी तरह की गलतफहमी के शिकार होते हैं। वे हर वक्त दहशत फैलाने की कोशिश करते हैं। खून खराबा कर ये समझते हैं कि किसी भी मुल्क को तबाह किया जा सकता है। पूरे विश्व की शांति के लिए कई बार खून का घूंट पीना पड़ता है। पर यह हमारी कमजो़री नहीं। कई बार युद्ध टालना बुद्धिमानी होती है जिसे आतंकवादी संगठन कमज़ोरी समझ लेते हैं। पर लिहाज़ किसी भी परिस्थिति में करना पडे़ वो कमजो़री नहीं होता।
आतंकवादी हमले उनकी कमज़ोरी हैं हमारी नहीं। किसी भी तरह वह लोग बहादुर नहीं होते जो पीठ पर वार करते हैं। आज तक मैं यह नहीं समझ पायी कि दहशत फैलाने वाले ये कैसे सोच भी लेते हैं कि ऐसा करके उनका मकसद कामयाब हो जायेगा। मासूमों का कत्ल करने से उन्हें स्वर्ग नसीब नहीं होगा। बुरे काम का नतीजा बुरा ही होता है। लिहाज़ करने वाला जब पलट वार करता है तो आतंक की सदा के लिए छुट्टी हो जाती है।
इसी तरह घर परिवार में भी बुरे लोग संभल जाने चाहियें। जब शांत व्यक्ति आपा खोता है तब बुरा करने वाले अकसर या तो भाग जाते हैं या फिर छिपकर वार करते हैं। शांति सुखद भविष्य के लिए बहुत ज़रूरी है पर साथ ही यह चेतावनी है उन लोगों को जिन्होंने शायद इसका महत्व ही नहीं समझा है या इतिहास से रूबरू कभी नहीं हुए हैं। बुरे कर्म से बचना असंभव है।
किसी भी ताकतवर मुल्क या इंसान पर आतंक का कोई असर नहीं होता है। एक जुट होकर जवाब देने से दहशतगर्द टिक नहीं पाते हैं। लिहाज़ कभी अपने से बड़ों का होता है या कभी विश्व के हित में। दोनों ही सूरतों में यह एक प्रयास है , एक आखिरी प्रयास। इसके बाद जो भी रास्ता लिया जाये उसका जि़म्मेदार बुरा इंसान ही होता है। लिहाज़ करने वाले को कमजो़र ना समझें। उसके खिलाफ षडयंत्र बंद कर दें अन्यथा परिणाम भुगतने को तैयार रहें। कभी कभी सारे पापों का हिसाब एक साथ ही हो जाता है।
जय हिन्द।